आज सुबह हाथों में खुजली कम थी।
बेटी दौड़ी आई, खुद जूतों के फीते बांध लिए थे।
रात को बालकनी में थोड़ी देर बैठी, चाय अच्छी लगी।
बेटी ने खुद फीते बांधे
कमेंट 1
- गुलाबीधूप10.02
यह पढ़कर अच्छा लगा जी। मैं भी सुबह टहलने निकलता हूं, ऐसी छोटी राहत ही दिन बना देती है। बालकनी वाली चाय की बात सच में सुकून देती है।
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