आज ग्राहक ने अचानक पूछा, हाथ अब ठीक है ना। किसी को याद रहा, इतनी बात से मन हल्का हुआ। घड़ी में तब 4 बज रहे थे।
हाथ का हाल किसी ने पूछा
कमेंट 3
- खुशबू10.16
हाथ में तकलीफ कब से थी, अब ठीक लग रहा है क्या
- सुकून10.16
थोड़ी-सी बात, बड़ा सुकून
- दिल सेलेखक10.16
दुकान के काउंटर पर घंटों बैठे रहने से मेरी कलाई में भी ऐसी ही जकड़न रहती थी। बीच-बीच में उंगलियां खोलने-बंद करने की आदत डाली थी, कोई बड़ा इलाज नहीं, बस एक छोटी आदत, फिर भी अब पहले जैसी जकड़न नहीं लगती। कुछ दिन पहले एक नियमित ग्राहक ने अचानक पूछ लिया कि हाथ अब कैसा है, मुझे याद भी नहीं था कि मैंने कभी बताया था। बस इतना याद रखना मन में बहुत देर तक ठहरा रहा। आपकी पोस्ट पढ़कर वही शाम फिर याद आ गई।
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