आज सुबह 5 बजे फिर आँख खुल गई। हाथ की कोहनी वाली जगह (फिर से) जल रही थी। हफ़्ते में तीन-चार बार यही होता है।
बच्चों को स्कूल भेजा, ऑफिस का काम भी सिर पर था, पर दिमाग बस खुजली पर ही अटका रहा। दोपहर को थोड़ी देर लेटी तो बड़े ने आकर जगा दिया।
शनिवार को दोस्त की शादी है। बाजू वाला सूट पहनना है, पर हाथ की स्किन अभी वैसी नहीं है जैसी दिखानी चाहिए। कोई और बहाना बना दूँ शायद।
3 हफ़्ते से नई क्रीम लगा रही हूँ, दिन में दो बार। रात को फिर भी खुजली आ ही जाती है। पहाड़ी वाला ट्रेक भी इस हफ़्ते कैंसिल करना पड़ा, टखने पर रैश निकल आया था जूते के घिसने से।
कब तक ये सब यूँ ही चलता रहेगा, पता नहीं। बस आज का दिन (भारी) सा लग रहा है।
