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मन का समय ›मन का मौसम

बेदम सी दोपहर

आज सुबह से शरीर में बिलकुल ताकत नहीं है, मतलब उठी तो हूं लेकिन कहां से शुरू करूं समझ नहीं आया,

आटा गूंथकर रखा था, ब्रेड बनाने का सोचा था, पर आधे घंटे बाद ही हाथ जवाब दे गए, तो वो आटा फ्रिज में ही पड़ा रह गया,

इस हफ्ते फ्रीलांस में तीन प्रोजेक्ट एक साथ आ गए, पिछले पूरे महीने एक भी नहीं था, यही उतार-चढ़ाव सबसे थका देता है,

खाता-बही फिर से लिखनी शुरू की थी, 12 दिन हो गए, आज का हिसाब अभी तक नहीं लिख पाई,

त्वचा तो 3 हफ्तों से शांत है, स्थिर सी, फिर ये कमज़ोरी कहां से आ रही है?

गुरुजनों, आपको भी कभी लगता है कि त्वचा ठीक होते-होते बाकी शरीर पीछे रह जाता है?

कमेंट 1

  • चायप्रेमी05.20

    मेरे साथ भी था जी, स्किन ठीक फिर भी थकान 10 दिन तक रही!

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