रात के 1 बज चुके हैं, नींद अभी भी दूर है।
पहले 11 बजे तक आँख लग जाती थी, अब यही समय हर रात खिसकता जा रहा है।
ऑफिस का काम खत्म करके बच्चों को सुलाने के बाद जो थोड़ा वक्त बचता है, उसी में मन शांत होने की जगह और भाग रहा होता है।
3 हफ्ते से हाथ की खुजली भी बढ़ी हुई है, लगता है काम के तनाव का ही असर है, हालांकि यह सिर्फ मेरा अंदाज़ा है।
(कल भी कैमरा लेकर गली में निकलने का सोचा था, पर हिम्मत ही नहीं जुटी)
दोनों बच्चों को संभालते हुए दिन तो किसी तरह निकल जाता है, रात होते ही सब कुछ भारी सा लगने लगता है।
सुबह फिर 6 बजे उठना है, यही सोचकर और नींद उड़ जाती है।
बस आज की रात थोड़ी हल्की हो जाए, इतनी ही उम्मीद है।
