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मन का समय ›मन का मौसम

अटकी हुई दोपहर

हाथों में आज फिर से खुजली शुरू हो गई। रात ठीक से नींद नहीं आई थी सो सुबह से ही मन भारी था। बच्चों को स्कूल भेजते भेजते कलाई की तरफ खरोंच आ गई देखा तो।

A view through three arched windows showing a rainy outdoor seating area. Outside are metal tables a

शाम को थोड़ी हवा चली तब जाकर हल्का सुकून मिला।

अगले हफ्ते एक शादी में जाना है सोच सोच कर ही थकान हो रही है। कौन सी बाजू वाली कमीज पहनूं अभी तय नहीं हुआ (हाथ ज्यादा ना दिखे बस)।

पहाड़ जाने का plan भी टल गया इस weekend। बस आज का मन ऐसा ही अटका हुआ रहा।

कमेंट 1

  • तितली03.17

    खुजली शुरू होते ही रात की नींद भी बिगड़ जाती है, यह बात मैं बहुत अच्छे से समझ सकती हूं, मेरे साथ भी बरसात में गर्दन और कोहनी के मोड़ पर यही हाल रहता है, हल्दी और नीम का लेप लगाकर देखा था, थोड़ी देर के लिए आराम तो मिलता है पर फिर वैसा ही हो जाता है, समझ नहीं आता कि आखिर करें तो क्या करें। शादी वाली बात तो एकदम मेरे मन की कह दी, अगले महीने भतीजे की शादी है और मुझे भी यही चिंता खाए जा रही है कि कौन

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