बारिश आते ही गर्दन और कोहनी की खुजली लौट आई है।
3 दिन से रात 2 बजे के आसपास नींद टूट जाती है।
कमरे में उमस ज्यादा है, पंखा भी असर नहीं दिखा रहा।
सुबह आईने में गर्दन पर हल्की सी लाली भी दिख गई।
मॉइस्चराइज़र आज 3 बार लगाया, फिर भी त्वचा खिंची हुई सी लगी।
बेटी ने टोका, “मम्मी फिर खुजा रही हो।”
मसाले से दूर रहती हूं, पर आज पकौड़े देख मन नहीं माना।
[नींद पूरी न होना] अब हर मानसून की पहचान बन गया है।

