धूप, बादल या बारिश — बस इतना लिख दें तो भी चलेगा। ऐसा क्यों लगा, यह बताना ज़रूरी नहीं। लिखना चाहें तो लिख सकते हैं। कुछ दिनों तक लिखते रहने से पता चलता है कि आपके मन का भी अपना एक रंग-ढंग होता है। अगर लगातार बादल ही छाए रहें, तो उस वक़्त ‘आंसू भरी कहानियां’ में विस्तार से लिख सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि यह किसी को दिखाने के लिए लिखा गया हो।
आज मन कैसा था, एक लाइन में
टिप्पणियाँ 0
- अभी कोई टिप्पणी नहीं।
लॉग इन करके टिप्पणी कर सकते हैं।
