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मन का समय ›मन का मौसम

खिसकती सी रात

ऑफिस से निकलते-निकलते काफी रात हो चुकी थी।
घर आकर बच्चों को सुलाने में ही थकान उतर गई।

अपने लिए बैठी तो गर्दन के पास फिर खुजली शुरू हो गई।
सोने का समय दिन-ब-दिन पीछे खिसकता जा रहा है।

Raindrops on a car window blur the view of tall buildings and a parked white car outside. The scene

काम का बोझ अब सीधा शरीर पर दिखने लगा है।
पुरानी फिल्म रोल कैमरे से निकलवाई थी, अभी तक देखने की फुर्सत नहीं निकली।

बस यही चलता रहता है आजकल।

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