ऑफिस से निकलते-निकलते काफी रात हो चुकी थी।
घर आकर बच्चों को सुलाने में ही थकान उतर गई।
अपने लिए बैठी तो गर्दन के पास फिर खुजली शुरू हो गई।
सोने का समय दिन-ब-दिन पीछे खिसकता जा रहा है।

काम का बोझ अब सीधा शरीर पर दिखने लगा है।
पुरानी फिल्म रोल कैमरे से निकलवाई थी, अभी तक देखने की फुर्सत नहीं निकली।
बस यही चलता रहता है आजकल।
