रात के 11 बजे के बाद से कंधे ऐसे अकड़ गए हैं जैसे किसी ने अंदर से रस्सी कस दी हो।
दिनभर मीटिंग में बैठने के बाद हथेली के पीछे वाला हिस्सा फिर से खुजला रहा है।
बच्चों को सुलाकर जब पुराना कैमरा उठाया तो हाथ हल्के से कांप रहे थे।
शायद ये सिर्फ़ मेरे साथ ही होता है।
आज भी रात 2 बजे के बाद ही आँख लगेगी शायद।
