सुबह से मन पर एक भारी सा कोहरा है।
कल शाम पहाड़ी रास्ते पर गए थे, हवा बहुत ठंडी और अच्छी लगी थी।
लौटते ही गर्दन पर पसीना जमा हुआ और वही पुरानी खुजली शुरू हो गई।
रात को 3 बार नींद टूटी, हर बार हाथ अपने आप गर्दन तक चला जाता है।
सुबह उठकर आईने में देखा तो लाल निशान साफ दिख रहे थे, कुछ छुपाना पड़ेगा।
अगले हफ्ते सहेली की शादी है, फुल आस्तीन का कुछ ढूंढना पड़ेगा अभी से।
बच्चों को तैयार करके भेज दिया, चाय के साथ थोड़ी देर चुप बैठी रही।
आज मन का मौसम कुछ ऐसा है। बादल घिरे हैं, बारिश अभी तक नहीं आई।
घिरे बादल
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