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मन का समय ›मन का मौसम

फीकी हल्दी

सुबह से गर्दन और कोहनी की मोड़ वाली जगह पर वही पुरानी खुजली लौट आई है, बरसात की उमस लगते ही यह हर बार शुरू हो जाता है। रात को देर तक करवटें बदलती रही, नीद उखड़ती रही, हाथ खुजाते-खुजाते त्वचा और लाल हो गई। कल हल्दी और नीम का लेप लगाया था, 2 घंटे बाद थोड़ा ठंडक जैसा लगा था, सोचा शायद अब ठीक हो जाएगा, पर सुबह उठकर देखा तो वैसा ही निशान वहीं का वहीं। ब्लाउज़ का कपड़ा जहाँ रगड़ता है वहीं सबसे ज्यादा जलन होती है, ऊपर से यह उमस अलग परेशान करती है। अगले महीने भतीजे की शादी में हाथ खुले रखने ही पड़ेंगे, यही सोच-सोचकर मन कहीं भीतर से भारी हो रहा है।

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