आज सुबह ब्रेड बनाते वक्त आटा गूंधते हुए अचानक हाथ में खुजली शुरू हो गई। इतने सालों बाद फिर से यही सब लौट आया है, ये बात अभी तक समझ नहीं आती।
रात को ठीक 2 बजे नींद खुली। कलाई खुजा-खुजा के पूरी लाल हो चुकी थी। बत्ती जलाई तो साथ वाले भी जाग गए, बस चुपचाप देखते रहे, कुछ बोले नहीं।
कल रास्ते में एक रिश्तेदार मिलीं, बोलीं – ‘अरे ये तो बस मौसम बदलने का असर है, अपने आप ठीक हो जाएगा’ – मैं बस मुस्कुरा दी, आगे कुछ नहीं कहा।
अगले महीने भांजी की शादी है, उससे पहले 2 और शादियां भी निपटानी हैं। साड़ी के नीचे कलाई कैसे ढकूं, अभी तक कोई रास्ता नहीं सूझा।
रसोई में आज की बनी ब्रेड अभी भी रखी है, खमीर की महक पूरे घर में फैली हुई है। बस उसे देखते-देखते बीच-बीच में हाथों की तरफ नज़र चली जाती है।
