बरसात के इस मौसम में गर्दन और कोहनी की मोड़ पर जो खुजली शुरू हुई है वो रुकने का नाम ही नहीं ले रही, रात को सोते समय भी हाथ अपने आप वहीं पहुँच जाता है और सुबह उठकर देखती हूँ तो त्वचा और लाल हो चुकी होती है, ब्लाउज़ का कपड़ा जरा सा भी रगड़ खाए तो जलन अलग से शुरू हो जाती है, घर में सबसे कहती भी नही क्योंकि समझ ही नहीं आता कि क्या बताऊं और कैसे बताऊं।
बचपन में कुछ साल यही परेशानी हुई थी, फिर बरसों तक कुछ नहीं हुआ तो भूल ही गई थी कि ऐसा भी कुछ होता है, अब इस उम्र में दोबारा शुरू हो गया तो सच कहूं तो अंदर से थोड़ा डर सा लगता है, समझ नहीं आता कि शरीर अचानक ऐसा क्यों करने लगा, बेटे से पूछा तो उसने कहा उम्र के साथ ऐसा होता रहता है पर मन को इससे कोई तसल्ली नहीं मिलती, ऐसा लगता है जैसे कुछ अंदर ही अंदर गड़बड़ हो रहा है।
घर का सारा काम, बर्तन-कपड़े, मसाले, सब हाथ से ही होते हैं, ऊपर से नाती-पोतों को भी दिनभर संभालना पड़ता है तो हाथ पानी और साबुन-सर्फ में लगे ही रहते हैं, हल्दी और नीम का लेप बनाकर लगाया था, कुछ दिन थोड़ा आराम भी लगा फिर वैसा ही हो गया, समझ नहीं आ रहा कि इसमें ठीक क्या काम करता है और क्या सिर्फ मन का सुकून है।
पिछले हफ्ते पड़ोस में किसी ने गर्दन की तरफ देखकर पूछ लिया कि यह क्या हो गया, मैंने बात घुमा दी पर मन में कहीं चुभ गया, अब अगले महीने भतीजे की शादी है और वहां हाथ खुले रहेंगे, कोई रिश्तेदार दाग देखकर पूछ बैठेगा तो क्या जवाब दूं यही सोचकर परेशान रहती हूँ, पहले तो ऐसी किसी बात की फिक्र ही नहीं होती थी, अब हर फंक्शन से पहले यही ख्याल आने लगता है।
रात को नींद भी टाइम पर नहीं आती, ऐसे ही सोचते-सोचते देर हो जाती है, ऊपर से नई नौकरी के लिए भी थोड़ी भाग-दौड़ चल रही है, सामान भी ज्यादातर पुराना लिया-दिया हुआ ही जोड़ा है घर में, तो हिसाब-किताब का टेंशन भी अलग से रहता है, दिमाग वैसे ही भरा रहता है और ऊपर से यह खुजली, बस आज मन बहुत भारी लग रहा था तो सोचा यहाँ लिख दूं, कोई सुझाव नहीं चाहिए, बस कहीं कह देने से थोड़ा हल्का लगता है।
