बरसात शुरू हुए करीब तीन हफ्ते हो गए हैं, और गर्दन के पीछे वाले हिस्से में, कोहनी के मोड़ पर जो खुजली शुरू हुई थी वो अब तक रुकने का नाम नहीं ले रही है, ब्लाउज़ का कपड़ा जहां-जहां छूता है वहां और तेज हो जाती है, खासकर दोपहर के बाद जब पसीना आने लगता है।
बचपन में कोई आठ-दस साल की थी तब कुछ सालों तक यही परेशानी रहती थी, फिर बीच के इतने सालों में कभी कुछ नहीं हुआ था, अब बावन की उम्र में अचानक दोबारा शुरू हो जाना समझ नहीं आ रहा, मतलब डर भी लगता है कि पता नहीं अब कितने दिन तक ऐसे ही चलेगी।
घर का सारा काम खुद ही करती हूं, बहू के साथ मिलकर नाती-पोतों को भी संभालना पड़ता है, तो दिन में कई बार हाथ पानी में, साबुन में और मसालों में जाते रहते हैं, यही वजह होगी शायद।
करीब दस दिन पहले हल्दी और नीम की पत्तियां पीसकर लेप बनाया था और लगाना शुरू किया, पहले दो-तीन दिन सच में आराम लगा, खुजली कम हुई, लाल निशान भी थोड़े हल्के दिखे, लेकिन चौथे दिन से फिर वैसा ही हो गया, जैसे लेप का असर खत्म हो गया हो, अब भी लगा रही हूं पर उतना फर्क नहीं दिख रहा जितना पहली बार में दिखा था।
रात को खुजली ज्यादा बढ़ जाती है, कल रात करीब एक बजे तक नींद ही नहीं आई, बार-बार हाथ वहीं चला जाता है, इन दिनों वैसे भी सोने का समय रोज पीछे खिसकता जा रहा है, नौकरी बदलने के सिलसिले में रात को देर तक कागज-पत्तर देखती रहती हूं, तो नींद का पूरा हिसाब ही बिगड़ गया है।
अगले महीने भतीजे की शादी है, वहां हाथ खुले रहेंगे, आधी बांह का ब्लाउज़ पहनना पड़ेगा, अभी से यही सोचकर घबराहट होती है कि कोई निशान देखकर पूछ बैठा तो क्या जवाब दूंगी, रिश्तेदारों के सामने अलग से सफाई देनी पड़े ये अच्छा नहीं लगता।
घर का सामान अक्सर सेकंड हैंड ही जुटाती हूं, हाल ही में एक सूती चादर भी वैसे ही ली थी, सोचा रात को वही ओढ़ूं, सिंथेटिक से शायद और जलन होती हो, कितना फर्क पड़ेगा पता नहीं, बस आजमा रही हूं।
फिलहाल यही चल रहा है, किसी डॉक्टर को दिखाना है या घरेलू तरीके से ही कुछ दिन और देखूं, अभी तय नहीं कर पा रही हूं।
