आजकल काम का कोई ठिकाना नहीं, कभी इतना आ जाता कि सांस लेने का टाइम नहीं मिलता, कभी दिनों तक कुछ नहीं।
स्किन तो अब पहले जैसी नहीं भड़कती।
पर शरीर में वो ताकत ही नहीं बची, सुबह उठते ही थकान लगती है।
घर पे ब्रेड बनाना शुरू किया था, अब वो भी बीच में छूट जाता है।
खर्चे की डायरी फिर से शुरू की, सोचा था कुछ हिसाब में आएगा…
रूटीन बनाने की सोचती हूं तो थकान जीत जाती है।
