कल शाम ट्रेकिंग से लौटी, पूरे रास्ते पसीना बहुत हुआ। रात को कलाई पर खुजली शुरू हो गई, सुबह देखा तो लाल चकत्ते वापस आ गए हैं।
पिछले 6 हफ्ते से हालत थोड़ी ठीक लग रही थी। ऑफिस में भी किसी को पता नहीं चलता था। अब फिर वही सिलसिला शुरू, आस्तीन नीचे खींचकर बैठना पड़ रहा है।
अगले महीने तीन शादियां हैं। हर बार सोचती हूं इस बार [साफ त्वचा] के साथ जाऊंगी, पर होता नहीं। ब्लाउज़ का नाप भी आधी बांह वाला ही रखा है।
बच्चे पूछते हैं ये हाथ पर क्या है, जवाब देते-देते थक गई हूं…
रात को नींद भी पूरी नहीं होती, खुजली से बीच में दो-तीन बार उठ जाती हूं। आज सुबह भी यही हुआ, फिर बच्चों का टिफिन बनाते हाथ जल जैसा लग रहा था।
इतने सालों बाद भी शरीर इतनी जल्दी क्यों बिगड़ जाता है, समझ नहीं आता। बस आज मन भारी है इसलिए लिख दिया।
