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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

बच्चों के सोने के बाद भी आराम नहीं

ऑफिस से आकर बच्चों का होमवर्क, खाना, फिर सुलाना, ये सब निपटा के जब आखिर में अपने लिए बैठती हूँ तो हाथ अपने आप गर्दन और कलाई पर चला जाता है।
खुजाना बंद ही नहीं होता।

sky, sea, vietnam

पहले वीकेंड पर पहाड़ पर निकल जाती थी, उस थोड़े से समय में सब भूल जाती थी।
अब वो भी नहीं हो पा रहा है, क्रीम लगाओ, कपड़े बदलो, फिर आराम करो, यही चलता रहता है।

आजकल दोस्तों की शादियाँ भी लगातार आ रही हैं।
हर बार सोचती हूँ कि (फुल स्लीव्स) पहन लूँगी तो ठीक रहेगा, पर अंदर से पता है कि ये कोई हल नहीं है, बस छुपाना है।

पति और बच्चों के सामने कोशिश करती हूँ कि कुछ न दिखे, सब ठीक ही लगे।
पर सच कहूँ तो अंदर से बहुत थक चुकी हूँ।
किसी से कुछ पूछना नहीं है, बस मन हल्का करने के लिए लिख दिया।

कमेंट 2

  • निखार04.05

    रात को बच्चों के सोने के बाद भी हाथ गर्दन पर चला जाना, ये बात मुझे बहुत समझ आती है जी। मेरे साथ भी दस साल से ऊपर यही चलता रहा, अब हालत पहले से ठीक है पर उस थकान वाली रात अभी भी याद है। शादियों में फुल स्लीव्स पहनकर छुपाना, वो मैंने भी बहुत बार किया है। आप लोग कैसे संभालते हैं इन दिनों?

  • निखार04.06

    बच्चों को सुलाने के बाद भी हाथ अपने आप गर्दन और कलाई पर चला जाना, यह पढ़कर पुराने दिन याद आ गए, दफ्तर से लौटकर सारा काम निपटाने के बाद जब आखिर में अपने लिए बैठती थी तो खुजली ही साथ बैठती थी, क्रीम लगाना, कपड़े बदलना, यही सिलसिला बरसों चला, शादियों में फुल स्लीव्स पहनकर छुपाने वाली बात भी वैसी ही है जैसी मैंने खुद झेली है, छुपाना कभी हल नहीं होता बस थोड़ी देर के लिए टलता है, सबके सामने ठीक दिखने

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