ऑफिस से आकर बच्चों का होमवर्क, खाना, फिर सुलाना, ये सब निपटा के जब आखिर में अपने लिए बैठती हूँ तो हाथ अपने आप गर्दन और कलाई पर चला जाता है।
खुजाना बंद ही नहीं होता।

पहले वीकेंड पर पहाड़ पर निकल जाती थी, उस थोड़े से समय में सब भूल जाती थी।
अब वो भी नहीं हो पा रहा है, क्रीम लगाओ, कपड़े बदलो, फिर आराम करो, यही चलता रहता है।
आजकल दोस्तों की शादियाँ भी लगातार आ रही हैं।
हर बार सोचती हूँ कि (फुल स्लीव्स) पहन लूँगी तो ठीक रहेगा, पर अंदर से पता है कि ये कोई हल नहीं है, बस छुपाना है।
पति और बच्चों के सामने कोशिश करती हूँ कि कुछ न दिखे, सब ठीक ही लगे।
पर सच कहूँ तो अंदर से बहुत थक चुकी हूँ।
किसी से कुछ पूछना नहीं है, बस मन हल्का करने के लिए लिख दिया।
