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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

स्किन ठीक है, फिर भी ताकत नहीं

त्वचा अभी शांत है, खुजली भी नहीं
फिर भी हाथ-पैर में ताकत नहीं रहती

फ्रीलांस का काम भी अजीब है
कभी फुरसत नहीं मिलती, कभी हफ्तों कुछ नहीं आता

हिसाब-किताब फिर से शुरू किया था
कॉपी वहीं खुली पड़ी है, आगे लिखने का मन नहीं होता

आज रोटी सेंकने का मन था
आटा गूंधते ही थक गई, बीच में छोड़ दिया

शरीर में कोई तकलीफ नहीं दिखती
फिर ये थकान कहाँ से आती है

कमेंट 2

  • ताज़गी08.16

    स्किन शांत होने के बाद भी हाथ-पैर में ताकत न रहना बहुत जाना-पहचाना लगता है जी। ये कमज़ोरी आपको कब से महसूस हो रही है, हफ्ते भर से या उससे ज़्यादा समय से। फ्रीलांस के काम में लगातार तनाव रहे तो असर बाद में शरीर पर दिखता है, मेरे साथ भी ऐसा हुआ था। नींद का समय भी गड़बड़ चल रहा है क्या।

  • खुशबू09.07

    यही हाल मेरा भी है, स्किन ठीक है फिर भी हाथ-पैर में जान नहीं रहती (बहुत अजीब लगता है)

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