त्वचा अभी शांत है, खुजली भी नहीं
फिर भी हाथ-पैर में ताकत नहीं रहती
फ्रीलांस का काम भी अजीब है
कभी फुरसत नहीं मिलती, कभी हफ्तों कुछ नहीं आता
हिसाब-किताब फिर से शुरू किया था
कॉपी वहीं खुली पड़ी है, आगे लिखने का मन नहीं होता
आज रोटी सेंकने का मन था
आटा गूंधते ही थक गई, बीच में छोड़ दिया
शरीर में कोई तकलीफ नहीं दिखती
फिर ये थकान कहाँ से आती है
