रात के 2 बजे नींद खुल गई।
कलाई और कोहनी में खुजली इतनी बढ़ गई थी कि उठकर बैठना पड़ा।
कल संडे था, अकेले पहाड़ पर ट्रेक करने गई थी।
धूप तेज़ थी, पसीना भी बहुत आया।
शाम को हाथों पर लाल चकत्ते दिख गए थे, तब लगा था थोड़ा आराम करने से ठीक हो जाएगा।
पर रात होते होते सब बिगड़ गया।
सुबह ऑफिस जाना है, बच्चों का लंच बॉक्स भी बनाना है।
अगले हफ्ते एक और शादी है, इस महीने कुल (3 शादियां) हैं।
हर बार यही सोचती हूं, हाथ कैसे छुपाऊं।
डॉक्टर ने पिछली बार कहा था,
“धूप और पसीने से जितना हो सके बचिए”
पर ट्रेकिंग एक ही चीज़ है जिससे थोड़ा सुकून मिलता है, वो भी अब छोड़ना पड़ेगा शायद।
15 साल से यही चल रहा है, कभी कम कभी ज़्यादा।
आज बस बहुत थक गई हूं।
