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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

हाथ की खुजली, शादी में क्या कहूंगी

गर्दन और कोहनी के मोड़ पर जो खुजली शुरू हुई है, वो पिछले 3 हफ्तों से ठीक नहीं हो रही। हल्दी और नीम का लेप लगाया था तो 2 दिन थोड़ा आराम लगा, फिर तीसरे दिन से वही खुजली वापस आ गई, अब कुछ समझ में नहीं आता कि और क्या करूं।

घर का सारा काम, बर्तन-कपड़े, नाती-पोतों की देखभाल, ये सब हाथों से ही होता है। दिन में कई बार पानी-साबुन और मसालों से हाथ गीले होते रहते हैं, तो शायद इसी वजह से बार-बार बढ़ जाती है, ये बात पता तो है फिर भी काम टाला नहीं जा सकता।
बचपन में कुछ साल यही परेशानी थी, फिर करीब 35 साल तक कुछ नहीं हुआ। अब इस उम्र में 2 बारा शुरू हो गई तो मन थोड़ा घबरा गय है, ऐसा क्यों हो रहा है, समझ नहीं आ रहा।

ब्लाउज़ के कपड़े से भी गर्दन पर रगड़ लगती है तो और जलन होती है। कल रात भी नींद ठीक से नहीं आई, सोते-सोते 1 बज गया, फिर सुबह जल्दी उठकर फिर वही काम पर लग गई।

अगले महीने भतीजे की शादी है, हाथ खुले ही रहेंगे। कोई देखकर पूछ बैठेगा कि ये क्या हुआ हाथ में, तो क्या जवाब दूं, समझ नहीं आ रहा।
बहू भी कल पूछ रही थी -‘मम्मी जी, ये दाग कैसे हुआ’- तो मैंने बस इतना कह दिया कि गर्मी की वजह से हुआ होगा, अंदर से पता था कि बात इतनी सीधी नहीं है।

इन दिनों नौकरी के लिए भी थोड़ी भागदौड़ चल रही है, रात को देर तक सोचती रहती हूं, शायद इसी वजह से नींद भी पूरी नहीं हो पाती, और नींद कम हो तो खुजली भी ज्यादा लगती है, ये चक्र कहां से टूटेगा कुछ समझ नहीं आ रहा।
बस आज मन थोड़ा भारी था तो लिख दिया, कोई सलाह नहीं चाहिए, बस कहीं तो कहना था।

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