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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

ऑफिस का काम, बच्चे, और खुजली साथ-साथ

रात के 9 बजे तक ऑफिस की रिपोर्ट बना रही थी। कंप्यूटर बंद करते ही हाथ में खुजली शुरू हो गई।

बेटी उठ गई, बोली ‘मम्मी सो जाओ ना’, फिर खुद ही सो गई। मैं रात 1 बजे तक करवटें बदलती रही।

सुबह उठी तो कोहनी के पास (लाल निशान) साफ दिख रहे थे। बेटे का टिफिन बनाना था, समय ही नहीं मिला ठीक से देखने का।

अभी अगले 2 महीनों में 3 शादियां लाइन में हैं। हाथ कैसे दिखेगा, ये सोचकर ही थक जाती हूं।

काम, बच्चे, और यह खुजली, सब एक साथ चल रहा है। खुद के लिए वक्त निकलना मुश्किल हो गया है।

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