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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

उम्र के इस मोड़ पर फिर से वही खुजली

बचपन में करीब 8-9 साल की उम्र में भी यही तकलीफ हुई थी, फिर बरसों कुछ नहीं हुआ, शादी हुई, बेटा हुआ, घर-गृहस्थी सब ठीक-ठाक चलती रही, तो अब 52 की उम्र में एकदम से वापस यही शुरू हो जाना समज नहीं आ रहा।

गर्दन पर और दोनों कोहनी के मोड़ पर पिछले 3 हफ्ते से लगातार खुजली बनी हुई है, रात को ब्लाउज़ का कपड़ा जरा भी छू जाए तो और तेज हो जाती है, वैसे भी आजकल नींद 1 बजे से पहले आती नहीं, दिन भर घर का काम और नाती-पोतों को संभालना, हाथ पानी और साबुन-सर्फ में ही लगे रहते हैं, शायद वही वजह हो, पक्का कुछ पता नहीं।

हल्दी-नीम पीसकर लेप लगाया था, पहले 2 दिन तो अच्छा-खासा आराम लगा, मन में आया चलो अब ठीक हो जाएगा, फिर चौथे दिन वैसे का वैसा हो गया, समझ नहीं आता लेप से आराम था या बस मन का ही भरम था।

2 हफ्ते पहले सेकंड हैंड में एक अलमारी ली थी घर के लिए, उसे साफ करने में भी घंटों हाथ पानी में रहे, नई जॉब के लिए भी कुछ फॉर्म भरने हैं आजकल, रात को वही सब सोचते-सोचते और देर हो जाती है, नींद का कोई ठिकाना नही रहा।

सबसे ज्यादा मन अगले महीने की सोचकर भारी होता है, भतीजे की शादी है 18 तारीख को, हाथ खुले रहेंगे, चूड़ियां भी पहननी पड़ेंगी, कोहनी और गर्दन पर निशान साफ दिखेंगे, कोई पूछेगा तो क्या बताऊंगी कुछ समझ नहीं आता, इतने सालों बाद अपने ही शरीर पर भरोसा नहीं हो रहा है।

रात में जब सब सो जाते हैं तब अकेले बैठकर यही सोचती रहती हूं कि जो चीज बचपन में छूट गई थी वो अब इस उम्र में 2 बारा क्यों लौट आई, कोई ठीक-ठाक वजह भी समझ नहीं आती, बस रोज की जिंदगी वैसे ही चलती जा रही है और अंदर ही अंदर यह परेशानी लेकर फिर रही हूं।

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