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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

नौकरी की टेंशन में फिर वही खुजली

बरसात शुरू हुए महीना भर हुआ है, और गर्दन पर और कोहनी के मोड़ पर जो खुजली शुरू हुई है वो रुकने का नाम ही नहीं ले रही, रात को ब्लाउज़ का कपड़ा जरा सा भी छू जाए तो नींद खुल जाती है, और वैसे भी आजकल नींद देर से आती है, दिमाग में नौकरी वाली बात चलती रहती है तो अलग से नींद उड़ी रहती है, ऊपर से ये खुजली भी साथ में बैठ जाती है।

हल्दी-नीम का लेप लगाया, थोड़ा आराम भी लगा, सोचा चलो ठीक हो जाएगा, लेकिन कुछ दिन बाद फिर वैसा ही हो गया, मतलब समझ ही नहीं आता कि गलती कहां हो रही है, साबुन-सर्फ हाथ से छूटता नहीं, बर्तन-कपड़े, नाती को नहलाना-धुलाना, मसाले वाला काम, सब हाथ से ही होता है तो शायद वहीं से बिगड़ता होगा, पता नहीं।

बचपन में भी यही परेशानी हुई थी, फिर बरसों कुछ नहीं हुआ, अब इस उम्र में 2 बारा शुरू हो गई तो सच में सच में हैरानी होती है, थोड़ा डर भी लगता है कि अब बड़ी उम्र में ये सब कैसे सम्भलेगा।

अगले महीने भतीजे की शादी है, हाथ खुले रहेंगे, कोई निशान देख लेगा तो पूछेगा जरूर, तब क्या जवाब दूंगी समझ नहीं आ रह…। इधर नौकरी के इंटरव्यू की तैयारी भी चल रही है, घर का सामान भी सेकंड हैंड से जोड़ रहे हैं क्योंकि नया लेने की गुंजाइश नहीं, तो मन बहुत बहुत उलझा रहता है, ऊपर से ये त्वचा वाली बात, बस थोड़ा थका हुआ सा महसूस हो रहा है आजकल, आप सब को बताने में भी अजीब लग रहा था पर मन हल्का करने के लिए लिख दिया।

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