← सूची

मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

घर के सामान जुटाने में हाथ बेहाल

पिछले 15-16 दिनों से गर्दन और दोनों कोहनियों के मोड़ पर खुजली इतनी बढ़ गई है कि रात को बार-बार नींद टूट जाती है। बरसात शुरू होते ही यह सब वापस आ गया, वरना पिछले कई साल से कुछ खास परेशानी नहीं थी। बचपन में करीब 8-9 साल की उम्र तक यही दिक्कत रहती थी, फिर लंबे समय के लिए बिल्कुल ठीक रहा, तो अब 52 की उम्र में फिर से शुरू होना समझ नहीं आ रहा।

ब्लाउज़ का कपड़ा गर्दन पर रगड़ता है तो खुजली और बढ़ जाती है। घर का सारा काम, बर्तन-कपड़े, नाती-पोते संभालना, यह सब खुद करना पड़ता है, तो हाथों का साबुन और मसालों से बार-बार वास्ता पड़ता ही रहता है। हल्दी और नीम का लेप बनाकर लगाया था, पहले 2 दिन थोड़ा आराम भी लगा, फिर चौथे दिन से वही खुजली वापस।

ऊपर से इन दिनों नौकरी बदलने की सोच रही हूं, तो शाम को इंटरव्यू की तैयारी में बैठती हूं और सोने का समय रोज़ पीछे खिसकता जा रहा है, कभी 12 तो कभी 1 बज जाता है। घर का सामान भी ज़्यादातर सेकंड हैंड से जोड़ा है, तो पुराना सामान साफ करते-करते भी हाथों को कुछ न कुछ लगता रहता है।

अगले महीने भतीजे की शादी है, वहां हाथ खुले रहेंगे, और कोई निशान देखकर पूछ बैठे तो क्या कहूंगी यह सोचकर ही मन भारी हो जाता है। समझ नहीं आ रहा कि इतनी उम्र के बाद यह सब 2 बारा क्यों शुरू हो गया।

टिप्पणियाँ 0

  • अभी कोई टिप्पणी नहीं।
सभी पोस्ट देखें →