बरसात का ये मौसम शुरू हुए महीना भर हो गया है, गर्दन के पास और कोहनी के मोड़ पर खुजली रुकने का नाम ही नहीं ले रही, ब्लाउज़ का कपड़ा जरा सा भी छू जाए तो वहां जलन जैसी होने लगती है।
बचपन में कुछ साल यही परेशानी हुई थी, फिर इतने लंबे समय तक कुछ नहीं हुआ कि मैं भूल ही गई थी, अब इस उम्र में 2 बारा शुरू होने पर बहुत बहुत डर लगता है, समझ ही नहीं आता ये अभी क्यों लौट आई।
घर का सारा काम और नाती-पोतों की देखभाल खुद ही संभालती हूं, तो दिन में कई बार हाथ इनसे वास्ता पड़ता है –
– पानी
– साबुन-सर्फ
– मसाले
मतलब बचूं भी तो कहां से बचूं, ये भी समझ नहीं आता।
हल्दी और नीम का लेप लगाकर देखा था, 2 दिन तो सच में आराम लगा, तीसरे दिन से फिर वैसा ही हो गया, अब लेप पर भी भरोसा नहीं हो रहा।
नौकरी बदलने की टेंशन में यूं भी नींद 12-1 बजे से पहले नहीं आती, ऊपर से ये खुजली रात में और बढ़ जाती है, सुबह उठकर थकान से ज्यादा चिड़चिड़ापन रहता है।
अगले महीने भतीजे की शादी है, हाथ वहां खुले ही रहेंगे, अभी से यही सोचकर परेशान हो जाती हूं कि कोई दाग देख ले तो क्या जवाब दूं।
रात को यही सोचती रहती हूं कि इतने साल कुछ नहीं हुआ तो अभी क्यों, कोई वजह नहीं मिल रही, हाहा खुद पर ही हंसी आ जाती है इस हाल में, पर मन हल्का बिल्कुल नहीं होता।
