बरसात शुरू हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, और गर्दन के पास तथा दोनों कोहनियों के मोड़ पर वही खुजली फिर से शुरू हो गई है, ब्लाउज़ का कपड़ा जहां-जहां छूता है वहां जैसे जलन ही होने लगती है, रात को सोते समय भी चैन नहीं मिलता।
बचपन में भी कुछ साल यही तकलीफ हुई थी, फिर बरसों तक कुछ नहीं हुआ, सोचा था वो बात अब पुरानी हो गई, पर इस उम्र में 2 बारा शुरू हो जाएगी ऐसा कभी नहीं सोचा था, और यह जो हैरानी होती है, उसे शब्दों में बताना मुश्किल है।
घर का सारा काम, बर्तन-कपड़े, नाती-पोतों की देखभाल, सब खुद ही करती हूं, तो हाथों का पानी से, साबुन-सर्फ से और मसालों से बार-बार वास्ता पड़ता ही रहता है, और यही शायद तकलीफ को और बढ़ा देता है, पर काम तो करना ही पड़ता है, कोई और विकल्प नहीं है, शायद घर संभालने वाली सबको यही सब झेलना पड़ता होगा।
हल्दी और नीम का लेप लगाकर देखा था, तीसरे दिन थोड़ा आराम भी लगा, मन को लगा शायद ठीक हो रहा है, पर पिछले 12 दिन से फिर वही हाल है, समझ नहीं आ रहा कि वजह क्या है, मौसम है या पानी है या कुछ और, कुछ पता नहीं चल रहा।
अगले महीने भतीजे की शादी है, और उसमें हाथ खुले ही रहेंगे, गले पर भी निशान जैसा दिखता है, कोई देखकर पूछेगा तो क्या जवाब दूंगी, यही सोच-सोचकर मन भारी हो जाता है, रिश्तेदारों के सामने ये सब समझाना कितना अजीब लगता है, यह वही जानती है जिसे झेलना पड़ता है।
ऊपर से नौकरी बदलने की सोच भी चल रही है, इस उम्र में नई जगह कोशिश करना कितना मुश्किल होता है, मतलब सब कुछ एक साथ सिर पर आ जाता है, घर का ज्यादातर सामान भी सेकंड हैंड से ही जुटाया है, और इन दिनों नींद भी रोज़ देर से आती है, दिमाग में यही सब चलता रहता है।
पता नहीं ये सब उम्र की वजह से हो रहा है या रोज़ के काम की वजह से, बस इतना लगता है कि जो शरीर पहले साथ देता था वो अब उतना साथ नहीं दे रहा, और मन भी उतना ही थक गया है जितना शरीर।
