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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

इतने सालों बाद फिर वही खुजली शुरू

बरसात शुरू हुए काफी दिन हो गए हैं, गर्दन के पास और कोहनी के मोड़ पर जो खुजली शुरू हुई है वो रुकने का नाम ही नही ले रही, रात को सोते समय भी हाथ अपने आप वहीं चला जाता है, बिना सोचे समझे खुजाती रहती हूं।

बचपन में भी कुछ साल यही तकलीफ रही थी, फिर बरसों तक कुछ नहीं हुआ तो सोचा था अब कभी वापस नहीं आएगी, पर इस उम्र में फिर से शुरू हो जाना समझ नही आ रहा, थोड़ा डर सा भी लगता है कि अब शरीर पहले जैसा साथ नही दे रहा शायद।

घर का सारा काम खुद ही करती हूं, बर्तन धोना, कपड़े धोना, मसाले वाले हाथ बार बार पानी में डालना, नाती को भी संभालना पड़ता है तो शायद यही वजह भी हो, पता नही। हल्दी और नीम पीसकर लेप बनाकर लगाया था, शुरू में तो सच में आराम लगा, चैन से सो भी पाई थी, पर उसके बाद फिर वैसी ही खुजली लौट आई, जैसे कुछ हुआ ही न हो।

ब्लाउज़ का कपड़ा भी गर्दन पर रगड़ता है तो और तकलीफ होती है, ऊपर से घर के बाकी काम और अगले महीने घर में एक शादी भी है, तैयारी की बातें अलग चल रही हैं, ऐसे में अपने लिए देखने का वक्त ही नही मिल पाता ठीक से, रात को नींद भी देर से आने लगी है इन दिनों।

बस मन हल्का करने के लिए यहां लिख दिया, दिल में जो चल रहा था वो रख दिया।

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