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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

उम्र के इस पड़ाव में फिर से यही तकलीफ

पिछले कुछ दिनों से गर्दन के पास और कोहनी के मोड़ पर खुजली इतनी बढ़ गई है कि रात में बार-बार नींद खुल जाती है, फिर सोने में देर हो जाती है, और सुबह घर के काम पर निकलना पड़ता है तो थकान अलग से रहती है।

बचपन में यही परेशानी कुछ साल रही थी, फिर लंबे समय तक कुछ नहीं हुआ, तो अब इस उम्र में 2 बारा शुरू हुई है तो समझ ही नहीं आ रहा कि क्या करूं, हैरानी भी है और थोड़ा डर भी लगता है कि आगे ये कैसा रूप लेगी!

घर में बर्तन-कपड़े, नाती की देखभाल, मसालों वाला सारा काम हाथों से ही होता है, तो साबुन-सर्फ का पानी लगातार लगता रहता है, इससे बचना मुश्किल है, कोई और है भी नहीं जिसे ये काम सौंप दूं।

हल्दी और नीम का लेप लगाकर देखा था, शुरू में लगा कि आराम मिल रहा है, त्वचा थोड़ी शांत हो गई थी, पर फिर वैसा ही होने लगा। अब लेप बनाने-लगाने का मन भी नहीं करता, रोज़ की भागदौड़ में इतना वक्त निकालना भी हो नहीं पाता।

पति ने किसी दिन देखकर बस इतना कहा कि “इतना मत सोचो, ठीक हो जाएगा”, पर मन में यही चलता रहता है कि इस उम्र में ऐसा क्यों हो रहा है, बचपन की बात होती तो अलग थी।

नौकरी बदलने की तैयारी भी साथ में चल रही है, तो दिमाग वैसे ही थका हुआ रहता है, ऊपर से रात को देर तक जागना और सुबह फिर वही खुजली, अभी तो बस यही चल रहा है।

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