बरसात शुरू होने के बाद से गर्दन और कोहनी के मोड़ पर जो खुजली शुरू हुई थी वो अभी तक गई नही, हल्दी और नीम का लेप लगाया था, कुछ दिन तो सच में आराम लगा था, फिर वैसी ही खुजली वापस आ गई, अब समझ नही आता दवा में कमी है या मुझसे ही कुछ गलत हो रहा है।
घर का सारा काम अपने हाथ से ही करती हूं, बर्तन, कपड़े, मसाले, नाती-पोतों को नहलाना-खिलाना, सब में हाथ पानी और साबुन में डूबे रहते हैं, त्वचा को सूखने का मौका ही नही मिलता, रात को खुजली से नींद टूट जाती है, कल रात भी घड़ी में 3 बज रहे थे और नींद पूरी तरह उड़ चुकी थी।
बचपन में भी कुछ साल यही परेशानी रही थी, फिर सालों तक कुछ नही हुआ तो मन में बैठ गया था कि अब जिंदगी भर नही होगा, अब इस उम्र में 2 बारा शुरू हो गया है तो समझ ही नही आ रहा कि क्या बदल गया, खाने-पीने की वजह से है, मौसम की वजह से है या घर के काम की वजह से, कुछ तय नही कर पा रही।
ऊपर से अगले महीने भतीजे की शादी है, जो ब्लाउज़ सिलवाया है उसमें गर्दन और हाथ दोनों खुले रहेंगे, कोई निशान देखकर पूछ बैठा तो क्या जवाब दूंगी यही सोचकर घबराहट होती है। नौकरी बदलने की तैयारी भी चल रही है तो रात और देर तक जागना हो जाता है, घर का सामान भी ज्यादातर सेकंड हैंड से जोड़ा है तो हिसाब-किताब की टेंशन अलग से रहती है, अपने लिए बैठकर सोचने का वक्त ही नही मिलता।
