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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

ट्रेक के बाद घुटनों के पीछे खुजली

इतवार को दोस्तों के साथ पहाड़ी ट्रेक पर गई थी। 3 घंटे की चढ़ाई थी, पसीना बहुत हुआ। घुटनों के पीछे वाली जगह हमेशा से कमज़ोर रहती है, वहीं फिर से लाल हो गई। शाम तक खुजली इतनी बढ़ गई कि पैंट उतारते ही देखा, त्वचा वहां (छिली हुई) थी।

घर आकर बच्चों को खाना देना था, फिर होमवर्क भी। अपने लिए वक़्त निकालना मुश्किल हो गया।

रात को नींद टूट गई, फिर सो नहीं पाई।

अगले हफ़्ते एक सहेली की शादी है, उसके बाद दो और हैं। सबमें साड़ी-सूट पहनना है, हाथ-पैर दिखेंगे। एक सहेली ने पूछा, “अब कैसी है तबीयत।” मैंने बस हां में सिर हिला दिया, बताने का मन नहीं हुआ।

इलाज अभी शुरू ही किया है, बहुत कुछ बदलना बाकी है। शरीर पुरानी आदत जल्दी नहीं छोड़ता। ऑफिस, बच्चे, घर – सब साथ चल रहा है, बस त्वचा साथ नहीं दे रही।

आज मन बहुत भारी है।

टिप्पणियाँ 1

  • गुनगुन09.18

    ट्रेक की सारी मेहनत जोड़ों को गई और इनाम घुटनों के पीछे मिला, यह तो कमाल हुआ जी। मेरी दुकान में भी दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना पड़ता है, ऐसे में 2 घंटे लगातार बैठने के बाद वहीं खुजली शुरू हो जाती है, तो पहाड़ चढ़ने का तो सोच भी नहीं सकती। तीन शादियां लाइन में हैं और साड़ी में हाथ-पैर दिखने की टेंशन अलग से, सच में मुश्किल घड़ी है। इलाज अभी शुरू हुआ है तो शरीर को थोड़ा वक़्त दीजिए, पुरानी आदत

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