इतवार को दोस्तों के साथ पहाड़ी ट्रेक पर गई थी। 3 घंटे की चढ़ाई थी, पसीना बहुत हुआ। घुटनों के पीछे वाली जगह हमेशा से कमज़ोर रहती है, वहीं फिर से लाल हो गई। शाम तक खुजली इतनी बढ़ गई कि पैंट उतारते ही देखा, त्वचा वहां (छिली हुई) थी।
घर आकर बच्चों को खाना देना था, फिर होमवर्क भी। अपने लिए वक़्त निकालना मुश्किल हो गया।
रात को नींद टूट गई, फिर सो नहीं पाई।
अगले हफ़्ते एक सहेली की शादी है, उसके बाद दो और हैं। सबमें साड़ी-सूट पहनना है, हाथ-पैर दिखेंगे। एक सहेली ने पूछा, “अब कैसी है तबीयत।” मैंने बस हां में सिर हिला दिया, बताने का मन नहीं हुआ।
इलाज अभी शुरू ही किया है, बहुत कुछ बदलना बाकी है। शरीर पुरानी आदत जल्दी नहीं छोड़ता। ऑफिस, बच्चे, घर – सब साथ चल रहा है, बस त्वचा साथ नहीं दे रही।
आज मन बहुत भारी है।
