गर्दन और कोहनी के मोड़ पर बारिश शुरू होते ही फिर से वही पुरानी खुजली लौट आई है, ब्लाउज़ का कपड़ा जहां-जहां छूता है वहां रात को नींद तक नहीं आती। बचपन में कुछ साल यही तकलीफ रही थी, फिर लंबे समय तक कुछ नहीं हुआ, अब इस उम्र में 2 बारा शुरू हो जाना अभी तक समझ नहीं आ रहा।
घर का सारा काम, नाती-पोतों को संभालना, बर्तन-कपड़े, मसाले, सब हाथ से ही करने पड़ते हैं तो साबुन-सर्फ का पानी हाथों में बार-बार लगता रहता है। रात को काम खत्म करके हाथ देखती हूं तो मोड़ों पर लाल पड़ा दिखता है, दिन भर काम में इतना ध्यान भी नहीं जाता।
कुछ चीज़ें आज़मा कर देखी हैं –
– हल्दी और नीम पीसकर लेप
– ठंडे पानी से सिकाई
– काम करते वक्त हाथों में दस्ताने
लेप से कुछ दिन तो अच्छा लगा, खुजली कम हो गई थी, सोचा अब ठीक हो जाएगा, पर फिर वैसा ही हो गया। समझ नहीं आता असर हुआ ही नहीं था या बस कुछ दिन के लिए राहत मिली थी।
भतीजे की शादी सामने है, हाथ खुले रहेंगे, अभी से सोचकर मन भारी हो जाता है कि कोई देख कर पूछ ले तो क्या बताऊंगी। बेटे ने एक दिन हाथ पर निशान देख लिया था, बस इतना बोला, “अम्मा फिर वही तकलीफ है क्या”, उससे ज़्यादा कुछ नहीं पूछा, पर मन में अंदर ही अंदर अजीब सा लगा।
नौकरी के लिए भी इन दिनों इधर-उधर बात चल रही है, टेंशन अलग से बना रहता है, नींद वैसे भी देर से आती है, ऊपर से यह खुजली मन को और परेशान कर देती है। घर का ज़्यादातर सामान पुराना जमा हुआ, सस्ते में लिया हुआ है, तो हाथ का काम वैसे भी कम नहीं है।

अभी बस देख रही हूं, कोई पक्का तरीका पता नहीं है मेरे पास, जो हाथ में है वही आज़मा रही हूं।
