आज शाम ऑफिस से लौटी तो थोड़ी लेट हो गई, घड़ी में 8 बज चुके थे।
बेटी दौड़ती हुई आई, गले लगी, फिर हाथ पकड़ लिया।
थोड़ी देर बाद उसने पूछ लिया, “मम्मी, आपकी स्किन पर ये दाग जैसा क्यों है?”
मैं कुछ नहीं बोल पाई!
मैं (2 महीने) से क्रीम लगा रही हूं, फिर भी हाथ पर निशान वैसे ही दिखते हैं।
बच्चे की आंखों में घिन नहीं थी, बस उत्सुकता थी, पर मुझे अंदर तक चुभ गया।
दिनभर ऑफिस का काम, फिर घर आकर दोनों बच्चों को संभालना।
रात को थोड़ी फुर्सत मिलती है तो खुजली शुरू हो जाती है।
नींद पूरी नहीं होती।
अगले हफ्ते से दोस्तों की शादियों का सीज़न भी शुरू हो रहा है।
हर बार सोचती हूं क्या पहनूं, हाथ कैसे छुपाऊं।
वीकेंड पर ट्रेक पर जाकर थोड़ा सुकून जरूर मिलता है, पर वो भी बस कुछ घंटों का होता है।
आज बेटी का सवाल दिमाग से नहीं निकल रहा।
बस यही लग रहा है कि इस उम्र में भी खुद को समझा नहीं पा रही।
