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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

इस बार ट्रेक पर जाना नहीं टाला

वीकेंड पर ट्रेक पर जाने का प्लान बहुत दिन से था। मन में डर था कि हाथ-पैर की स्किन देखकर लोग कुछ बोलेंगे। फिर सोचा बच्चों को इस बार मना नहीं करूंगी।

निकलने से पहले अच्छे से मॉइश्चराइज़र लगाया। फुल स्लीव्ज़ पहनीं, गर्मी में भी। रास्ते में पसीना आया तो हल्की खुजली शुरू हो गई, पर ध्यान बच्चों की तरफ था तो कम महसूस हुई।

बीच में बेटी बोली, “मम्मी आप तो एकदम ठीक चल रही हो।” ये सुनकर अच्छा लगा।

ऊपर पहुंचकर हवा बहुत अच्छी लगी। लौटते वक्त हाथ थोड़े लाल हो गए थे, रात को क्रीम लगाकर सो गई।

अभी भी हर बार यही सोचना पड़ता है कि क्या पहनूं, क्या छुपाऊं। पर [इस बार खुद को रोका नहीं], यही सबसे अच्छा लगा।

कमेंट 2

  • गुलाबीधूप09.23

    मुझे भी वही डर रहता है, रोका नहीं ये अच्छा लगा

  • गुनगुन09.25

    गर्मी में दिक्कत नहीं हुई?

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