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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

रात का गेम, सुबह की थकान

पिछले हफ्ते जांच की रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ने सीधा कहा, “BP थोड़ा ज्यादा है, रोज चलना शुरू करो, नींद का टाइम भी ठीक करो.” सुनकर मन थोड़ा भारी हो गया था.

अगले दिन से सुबह निकलना शुरू किया. घुटनों पर ज्यादा जोर नहीं डाल सकती, इसलिए 15 मिनट ही चल पाती हूं. उतना भी काफी लगता है शुरू में.

रात को तय करती हूं मोबाइल गेम 10 बजे बंद कर दूंगी. पर कल रात भी 1 बजे तक चलता रहा. अगली सुबह आंखें भारी थीं, चलना और मुश्किल लगा.

नौकरी बदलने के बारे में सोच रही हूं, पर resume बनाने का टाइम ही नहीं निकाल पा रही. इस साल किताब के 10 पन्ने रोज पढ़ने का सोचा था, वो भी बस सोचना ही रह गया अब तक.

सब कुछ एक साथ ठीक करने की कोशिश में कुछ भी ठीक से नहीं हो रहा, बस यही महसूस हो रहा है आजकल.

कमेंट 1

  • खुशबू10.10

    रात का game मेरा भी…

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