कल रात बेटी की नींद खुल गई। मुझे खुजलाते हुए देखकर एकदम डर गई। बोली- मम्मी को क्या हुआ है, हाथ पर ये सब क्या है। मैं कुछ ठीक से बता नहीं पाई, बस गले से लगा लिया।
ये रोज़ की बात है पर बच्चों के सामने होना बिल्कुल अलग लगता है। सुबह ऑफिस निकलने से पहले भी हाथ में खुजली शुरू हो गई थी, पूरे दिन ध्यान उसी पर रहा। शाम को बच्चों का होमवर्क, फिर शादी के लिए कपड़ों की शॉपिंग भी बाकी है। रात को खुजली से नींद टूटती है। अभी (रिकवरी) शुरू ही की है इसलिए फर्क अभी नहीं दिख रहा। वीकेंड पर ट्रेक पर जाने का मन था, हाथ की हालत देखकर टाल दिया। ऊपर से इस महीने शादियों का सीज़न भी चल रहा है, फुल स्लीव्स के बिना कोई रास्ता नहीं बचता।
मन करता है सब कुछ छोड़कर बस सो जाऊं। पति से भी ठीक से कह नहीं पाती, वो अपने काम में लगे रहते हैं। बेटी का वो डरा हुआ चेहरा अभी भी आँखों के सामने घूम रहा है।
