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मन का समय ›आँसुओं की कहानियाँ

आज ड्यूटी 2 घंटे बढ़ा दी गई

आज पार्ट टाइम ड्यूटी पर सीनियर ने अचानक कह दिया, “2 घंटे ज़्यादा रुकना होगा।”

मन में मना करने का सोचा।

ज़बान तक आया, फिर रुक गया।

हाँ कह दिया।

रात को देर से घर पहुँची।

थकान से ज़्यादा मन भारी था।

(ना नहीं कह पाई) यह बात बार-बार दिमाग में घूम रही है।

पहला, स्टडी का प्लान आज भी छूट गया।

दूसरा, सीनियर से दूरी कैसे रखूं, यह अब भी समझ नहीं आता।

यह थकान सिर्फ शरीर की नहीं, मन की भी है, यही सबको बताना था।

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