सुबह सैर से लौटकर आज पहली बार घर पर बीपी मापने की मशीन निकाली।
यह मशीन दुकान से खरीदी थी, कई दिन से डिब्बे में बंद पड़ी थी।
हाथ पर पट्टी बांधी, बटन दबाया, और मशीन बोलने लगी।
जो आंकड़ा स्क्रीन पर आया वो देखकर एक पल के लिए सांस ही रुक गई।
जांच वाले दिन डॉक्टर ने कहा था, ‘ध्यान रखिए, वरना आगे दवा बढ़ानी पड़ेगी।’
वो बात तब ज्यादा असर नहीं कर पाई थी, आज मशीन के सामने बैठकर बात अंदर तक उतर गई।
सैर रोज कर रही हूं, फिर भी यह देखकर मन भारी हो गया।
किसी को बताया नहीं, बस थोड़ी देर वहीं चुपचाप बैठी रही।
