कल रात से मन भारी है… आज सुबह अलमारी खोली, हाथ ही नहीं गया किसी sleeveless dress पर। सोचा रहने दो, कुछ और पहन लूँगी। इस महीने तीन शादियाँ हैं, एक cousin की, दो friends की। Invitation आते ही पहला ख्याल यही आता है — क्या पहनूँगी, हाथ कैसे छुपाऊँगी।
पिछले sunday trek पे गई थी, हमेशा की तरह। पर इस बार पूरे रास्ते दुपट्टा tight लपेटे रखा। धूप और पसीने में जलन और बढ़ गई। बाकी सब t-shirt में मज़े कर रहे थे, मैं वहाँ भी यही सोचती रही, कोई देख तो नहीं रहा।
बड़ा बेटा, 8 साल का है, कल पूछ रहा था — “mumma ये हाथ पे क्या है, दर्द होता है?” कुछ समझ नहीं आया उसे कैसे बताऊँ।
ऑफिस में भी कल एक colleague ने पूछ लिया, allergy है क्या… बस हाँ बोल के बात टाल दी।
2 साल से चल रहा है ये सब (अभी बस शुरुआत है थोड़ा ठीक होने की तरफ)। इतनी जल्दी बहुत कुछ बदलने वाला भी नहीं है शायद।
– सुबह office
– शाम दोनों बच्चे
– weekend में trek या शादी की तैयारी
इसी में अपने लिए time ही नहीं बचता, ऊपर से ये सब चलता रहता है।
समझ नहीं आता इतनी शादियों में इस बार क्या पहनूँगी…
