
शादियों का सीज़न आ गया है।
मन अभी से भारी हो रहा है।
एक के बाद एक कार्ड आ रहे हैं।
सबकी shopping, सबकी तैयारी, साथ में दोनों बच्चे भी संभालने हैं।
सबसे ज्यादा सोचना outfit को लेकर पड़ता है।
आस्तीन (sleeves) लंबी हो, गला ढका हो, यही ध्यान रहता है हर बार।
पिछली शादी में किसी रिश्तेदार ने हाथ देखकर पूछ लिया था कि ये क्या है।
उस वक़्त जवाब देने में बड़ा अजीब लगा था।
इस बार भी शायद वही सवाल फिर आएगा।
हर बार अलग तरीके से explain करना, अब थकान होने लगी है।
वीकेंड पर पहाड़ चढ़ना ही एक चीज़ थी जिससे सुकून मिलता था।
वो भी इस महीने shaadi की भागदौड़ में कहीं पीछे छूट गया है।
husband कहते हैं इतना सोचने की क्या ज़रूरत है, कोई ध्यान नहीं देता।
पर जब कोई सच में पूछ ले तो उस वक़्त क्या करूं।
बस मन हल्का करने के लिए लिख दिया।
किसी और के साथ भी होता है क्या ऐसा इस सीज़न में।
