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साथ चलें ›खुली गपशप

1 बजे तक अब नींद ही नहीं आती

रात को सोने का टाइम धीरे-धीरे पीछे खिसकता जा रहा है।

पहले 11 बजे तक लाइट बंद हो जाती थी, अब 1 बजे भी आंख नहीं लगती।

ऑफिस का शिफ्ट बदला नहीं, बस दिमाग किसी वजह से देर रात तक भागता रहता है।

7 दिन से यही चल रहा है, शायद सिर्फ मेरे साथ ही ऐसा हो रहा हो।

कल रात पुराना फिल्म कैमरा अलमारी से निकाल के बस हाथ में घुमाती रही, रोल डालने का मन ही नहीं हुआ।

बच्चे दोनों सो गए थे, घर में सिर्फ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी।

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