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कैमरा को हाथ लगाए हफ्तों हो गए

आजकल शाम को घर पहुंचते ही लगता है दिन अभी खत्म नहीं हुआ है।

बच्चों का होमवर्क, खाना, फिर ऑफिस का बचा काम।
यह सब निपटाते-निपटाते रात के ग्यारह बज जाते हैं।

पिछले तीन हफ्तों से कैमरा छुआ तक नहीं है।
पहले वीकेंड पर मोहल्ले में यूं ही निकल जाती थी, अब वो वक्त भी नहीं निकलता।

मेरे मामले में शायद सिर्फ काम का बोझ नहीं है, दिमाग भी शांत नहीं हो पा रहा इन दिनों।

पता नहीं आप सबका भी ऐसा ही होता है या नहीं।

बस आज मन हुआ यहां लिख दूं, किसी सलाह की जरूरत नहीं थी।

कमेंट 1

  • खुशबू09.07

    वीकेंड की फुर्सत अब मुझे भी नहीं मिलती, बच्चों के बाद कुछ अपने लिए बचता ही नहीं।

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