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साथ चलें ›खुली गपशप

दिनों का हिसाब गड़बड़ा गया है

आजकल दिन कैसे निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता।

सुबह बच्चों को तैयार करना, फिर ऑफिस पहुंचना, शाम को वापस वही घर का काम।

कैमरा अलमारी में जस का तस रखा है, बहुत समय से हाथ नहीं लगाया।

पहले छुट्टी के दिन मोहल्ले में निकल जाती थी, कुछ फ्रेम्स ले आती थी। अब वो भी बस एक याद जैसा लगने लगा है।

कल बड़े बेटे ने पूछा, “मम्मी आजकल कैमरा से फोटो क्यों नहीं लेती?”

जवाब ही नहीं सूझा उस वक्त।

Tiny kitten in a litter box

रात को सोने का इरादा जल्दी का होता है, पर टाइम फोन में ही पीछे खिसकता जाता है।

सुबह उठकर फिर वही थकान महसूस होती है, पता नहीं ऑफिस के काम की वजह से है या बस दिनों का बोझ बढ़ता जा रहा है।

किसी और को भी इन दिनों ऐसा ही महसूस होता है क्या, बस पूछने का मन हुआ…

कमेंट 1

  • मुस्कान03.03

    सवाल पूछकर अच्छा लगा जी

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