शाम को पैकिंग करते-करते एक डिब्बा खोला, बहुत दिनों बाद।
अंदर कॉलेज के दिनों की डायरी निकली। कुछ पन्नों पर बस स्केच बने थे, कोई लिखा हुआ कुछ नहीं।
देखकर थोड़ी हैरान हो गई, खुद को ही भूल गई थी कि इतना कुछ बनाया करती थी!
घर बदलना है तो सामान कम करना ज़रूरी है। पर ये डिब्बा साथ ले जाने वाली चीज़ों में रख दिया।
बाकी सब बाद में देखूंगी, आज बस इतना ही हुआ।

