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साथ चलें ›खुली गपशप

दिमाग रात को बंद ही नहीं होता

बिस्तर पर लेट गया सोने के लिए, नींद फिर भी नहीं आई

दिनभर थकान लगती रहती है, ऑफिस से आते ही आँखें बंद होने लगती हैं

पर जैसे ही लेटता हूं दिमाग एकदम जाग जाता है, ऑफिस का काम, बच्चों के स्कूल की चीज़ें, सब एक साथ घूमने लगता है

आजकल यही रूटीन बन गया है, थका हुआ रहता हूं पर नींद नहीं आती

बालकनी में कुछ देर कैमरा लेकर खड़ा रहा, बस यूं ही टाइम पास करने के लिए

पता नहीं ये फेज़ है या बस मेरे साथ ही ऐसा चल रहा है

सुबह फिर वही थकान लेकर उठना पड़ेगा

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