आज सुबह से रात तक बस भागदौड़ रही।
बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना, फिर office का एक urgent call, और शाम को सहेली की शादी की shopping भी करनी थी।
बीच में लगा कि (5 मिनट) भी अपने लिए नहीं बचे।
अगले महीने 3 शादियां हैं। सबकी तैयारी अलग, हर बार कुछ ना कुछ खरीदना, कहीं पहुंचना।
सच कहूं तो थक गई हूं। weekend पर trek पर जाने का मन बहुत था, पर इस बार शायद वो भी छूट जाएगा।
पति बोले, “थोड़ा आराम कर लो”
पर घर में आराम कहां मिलता है।
बच्चे भी इस उम्र में पूरा ध्यान मांगते हैं, office का काम भी कम नहीं हो रहा।
आज बस यहां लिख कर मन हल्का करने का मन हुआ।
