आज सुबह घर में कुछ अलग हुआ.
छोटी बोली आज मैं खुद बैग पैक करूंगी, अकेले. मैंने बस हां बोल दिया, कुछ और नहीं कहा.
25 मिनट लग गए उसे बस बैग पैक करने में. मैं बगल में खड़ी रही, हाथ नहीं लगाया.
School bus का टाइम हो गया था, दिल में थोड़ी घबराहट भी थी. पर वो टाइम पर तैयार हो गई.
बस में चढ़ते वक्त उसका चेहरा देखा, बहुत खुश लग रही थी खुद से.
Office पहुंचने में 12 मिनट लेट हो गया उसी वजह से. पर आज उस देरी का कोई मलाल नहीं है.
