आज ऑफिस में केक आया था किसी के बर्थडे पे।
सबने ले लिया, मैंने मना कर दिया।
कोई पूछे तो क्या बोलूं, अभी डाइट पर हूं इतना ही बोल पाई।
अंदर से लगा जैसे झूठ बोल रही हूं।
पूरी बात बताना मुश्किल है ना, हर किसी को थोड़ी समझानी पड़े।
बस चुपचाप मना कर देना आसान लगता है (अभी शुरुआत ही है)।
घर आके बेटी ने पूछा मम्मी आज मीठा क्यों नहीं खाया, वहां भी टाल गई।
कब तक ऐसे टालते रहूंगी पता नहीं।
काम भी खत्म नहीं होता, बच्चे भी अपनी जगह, और ये सब अलग से चलता रहता है मन में।
