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आटा गूंथते हाथ जवाब दे गए

कल शाम ब्रेड बनाने बैठी, आटा गूंथते-गूंथते हाथ एकदम जवाब दे गए।

पहले लगा बस थकान है, पर अब हर बार ऐसा ही होने लगा है।

काम इस हफ्ते बिलकुल नहीं है, पूरे दिन घर में बैठे रहने से शरीर भी जैसे जड़ हो गया लगता है, हाथ-पैर में ज़ोर ही नहीं बचता।

मां कहती हैं,
“थोड़ा चलना-फिरना शुरू कर।”

पर सुबह उठकर क्या करूं समझ नहीं आता, कहां से शुरू करूं।

आटा वहीं छोड़ के उठ गई, ब्रेड आज बनाई।

बस यही सोचती रह जाती हूं, इतनी कमज़ोरी क्यों लगती है, अभी तो घर का ही काम था।

क्या कहूं, समझ नहीं आता किधर से हाथ लगाऊं।

लंबा लिख दिया, माफ करना साथियों।

कमेंट 1

  • खुशबू09.15

    मेरे भी हाथ 2 हफ्ते से ऐसे ही (जवाब दे रहे हैं)

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