आज सुबह से एक ही खयाल दिमाग में घूम रहा था कि इतवार को अकेले थोड़ी देर पहाड़ी की तरफ निकल जाऊंगी।
शाम होते-होते पता चला कि वही दिन शादी की खरीदारी के लिए तय हो गया है।
बच्चों को स्कूल भेजना, ऑफिस का काम, और बीच में शादी की तैयारियां, सब एक साथ चल रहा है।
(अपने लिए) निकाला हुआ वो थोड़ा सा समय भी अभी छूट गया लगता है।
